सोनभद्र (समर सैम) उत्तर प्रदेश के नक्सल प्रभावित आदिवासी जिले के कोटा गाँव के नौटोलिया इलाके में मंगलवार दोपहर बड़ा हादसा हो गया। ब्रह्मदेव पब्लिक स्कूल में पढ़ाई चल रही थी कि अचानक गरज-चमक के साथ तेज बारिश शुरू हो गई। तभी आसमान से गिरी बिजली ने स्कूल और आसपास के क्षेत्र को दहला दिया। इसकी चपेट में आकर कक्षा 3 का छात्र अरविंद (8) और एक ग्रामीण की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि कक्षा 9 का छात्र दीपक (13) और छात्राएँ सोनमति (16) व रेखा (15) झुलसकर गंभीर रूप से घायल हो गईं। बिजली गिरने की जोरदार आवाज से पूरे विद्यालय में अफरा-तफरी मच गई। बच्चे सहमकर कक्षाओं से भागने लगे और माहौल चीख-पुकार से भर गया। ग्रामीणों की मदद से घायलों को नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पहुँचाया गया। डॉक्टरों ने अरविंद और ग्रामीण को मृत घोषित कर दिया, जबकि बाकी घायलों की हालत नाज़ुक बनी हुई है।
बिजली गिरी तो लुट गया घर-परिवार,
मासूम सपनों का टूट गया संसार।
बिना मान्यता के चल रहा था विद्यालय
स्थानीय लोगों का कहना है कि ब्रह्मदेव पब्लिक स्कूल वर्षों से बिना मान्यता के संचालित हो रहा था। न तो यहाँ बच्चों की सुरक्षा की कोई व्यवस्था थी और न ही बिजली से बचाव के लिए आवश्यक उपकरण लगाए गए थे। ग्रामीणों ने सवाल उठाया कि जब शिक्षा विभाग को बार-बार शिकायत दी गई थी, तो आखिर क्यों कार्रवाई नहीं की गई।
हर साल मौत बाँटती है आकाशीय बिजली
बरसात के मौसम में आदिवासी और दुर्गम इलाकों में आकाशीय बिजली का खतरा हमेशा मंडराता रहता है। आंकड़े बताते हैं कि उत्तर प्रदेश में हर साल दर्जनों लोग इसकी चपेट में आकर जान गंवाते हैं। विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि गाँवों, स्कूलों और भीड़भाड़ वाले स्थानों पर बिजली रोधक यंत्र (लाइटनिंग अरेस्टर) लगाए जाएँ और समय-समय पर जागरूकता अभियान चलाए जाएँ, तो मौतों पर काफी हद तक रोक लग सकती है।
प्राकृतिक संपदा से भरपूर लेकिन सुविधाओं से वंचित
यह पूरा क्षेत्र खनिज संपदा और प्राकृतिक संसाधनों से भरपूर है, लेकिन शिक्षा, स्वास्थ्य और आपदा प्रबंधन की सुविधाओं से आज भी वंचित है। बारिश और बिजली गिरने जैसी आपदाएँ यहाँ आम ग्रामीणों की जिंदगी के लिए बड़ा खतरा बन चुकी हैं।
प्रशासन पर उठे सवाल
इस हादसे ने एक बार फिर जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग की लापरवाही को उजागर कर दिया है। ग्रामीणों ने पीड़ित परिवारों को उचित मुआवजा देने और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग उठाई है। उनका कहना है कि जब तक सरकार और विभाग जागरूकता व सुरक्षा उपायों पर गंभीरता नहीं दिखाते, तब तक हर बरसात में ऐसी त्रासदियाँ होती रहेंगी।
कहाँ जाएँ अब मासूमों की अरमान भरी नज़रें,
जब खुद ही मौत बरसाए आसमान के घेरे।
Author: Pramod Gupta
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