प्रयागराज (समर सैम) इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पूर्वांचल के दिग्गज बाहुबली और पूर्व विधायक मुख्तार अंसारी के बेटे उमर अंसारी को जमानत दे दी है। उन पर आरोप है कि उन्होंने गैंगस्टर एक्ट के तहत जब्त की गई जमीन को छुड़ाने के लिए अदालत में फर्जी दस्तावेज पेश किए और इस दौरान अपनी मां के नकली हस्ताक्षर भी किए। यह आदेश न्यायमूर्ति डॉ. गौतम चौधरी की एकलपीठ ने शुक्रवार को सुनाया। जमानत अर्जी पर सुनवाई के दौरान उमर अंसारी की ओर से पेश अधिवक्ताओं ने दलील दी कि उनके मुवक्किल को राजनीतिक कारणों से फंसाया गया है। उनका कहना था कि जब्त जमीन को छुड़ाने के लिए कोर्ट में प्रस्तुत दस्तावेजों की सत्यता की जांच पूरी नहीं हुई है, बावजूद इसके उन्हें जेल में रखा गया है। बचाव पक्ष ने यह भी तर्क दिया कि उमर अंसारी का आपराधिक इतिहास नहीं है और वह इस मामले में निर्दोष हैं। वहीं, सरकार की ओर से पेश अधिवक्ता ने इसका विरोध किया और कहा कि दस्तावेजों में जालसाजी एक गंभीर अपराध है। इसमें सरकारी कामकाज में बाधा पहुँचाने की साजिश शामिल है। अभियोजन पक्ष का कहना था कि यदि आरोपी को राहत दी जाती है तो वह गवाहों को प्रभावित कर सकता है और साक्ष्यों से छेड़छाड़ की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद न्यायालय ने तथ्यों और परिस्थितियों को देखते हुए उमर अंसारी को सशर्त जमानत देने का आदेश दिया। कोर्ट ने साफ किया कि आरोपी जमानत की अवधि में न तो गवाहों को प्रभावित करेगा और न ही मुकदमे की कार्यवाही में हस्तक्षेप करेगा। इसके साथ ही अदालत ने उन्हें नियमित रूप से पेश होने का निर्देश दिया। उमर अंसारी को मिली इस राहत को लेकर राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। मुख्तार अंसारी परिवार पहले से ही कई कानूनी मुकदमों और चर्चाओं के केंद्र में रहा है। ऐसे में बेटे को जमानत मिलने को लेकर विपक्ष और समर्थक दोनों अपनी-अपनी प्रतिक्रिया दे रहे हैं। कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि अब इस मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन को दस्तावेजों की सत्यता को पुख्ता सबूतों के साथ सिद्ध करना होगा। यदि आरोप साबित होते हैं तो जमानत रद्द भी हो सकती है। वहीं, बचाव पक्ष का दावा है कि अदालत में सच सामने आने पर उमर अंसारी को पूरी तरह से बरी किया जाएगा। फिलहाल हाईकोर्ट के आदेश के बाद उमर अंसारी की रिहाई का रास्ता साफ हो गया है। अब नजर निचली अदालत में मुकदमे की कार्यवाही पर होगी, जहां असली परिक्षा अभियोजन और बचाव पक्ष दोनों की दलीलों की होगी।
Author: Pramod Gupta
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